Class 10 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Objective Questions Bihar Board
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यह पृष्ठ बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 'मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार' के लिए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) प्रदान करता है। इन प्रश्नों का अभ्यास करके आप अध्याय की मुख्य अवधारणाओं, जैसे नेत्र की संरचना, दृष्टि दोष और प्रकाश के प्रकीर्णन, को आसानी से समझ और दोहरा सकते हैं।
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मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Objective
मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार (दीर्घ उत्तरीय) Subjective
मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार (लघु उत्तरीय) Subjective
मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार: महत्वपूर्ण प्रश्न
बिहार बोर्ड कक्षा 10 की विज्ञान परीक्षा की तैयारी के लिए इस अध्याय के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अभ्यास आवश्यक है। यहाँ दिए गए प्रश्न अध्याय के सभी टॉपिक्स को कवर करते हैं।
मानव नेत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली
इस भाग के प्रश्न मानव नेत्र के विभिन्न भागों जैसे कॉर्निया, परितारिका (आइरिस), पुतली (प्यूपिल), लेंस, रेटिना और दृष्टि पटल (रेटिना) के कार्यों पर केंद्रित हैं। नेत्र में प्रतिबिंब बनने की प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं।
- नेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करने वाली पेशी का नाम क्या है?
- रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब कैसा होता है?
- दृष्टि का रासायनिक संकेत कहाँ पर विद्युत संकेत में बदलता है?
दृष्टि दोष एवं उनका संशोधन
मायोपिया (निकटदृष्टि), हाइपरमेट्रोपिया (दूरदृष्टि), जरा-दूरदृष्टि (प्रेस्बायोपिया) और मोतियाबिंद जैसे सामान्य दृष्टि दोषों के कारणों तथा उन्हें दूर करने के उपायों पर आधारित प्रश्न यहाँ दिए गए हैं। इन दोषों के संशोधन में प्रयुक्त लेंसों की प्रकृति (अवतल या उत्तल) पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं।
निकटदृष्टि दोष में व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता। इस दोष का कारण नेत्र लेंस की अत्यधिक वक्रता या नेत्र गोलक का लंबा होना है। इसका संशोधन एक उचित फोकस दूरी के अवतल लेंस द्वारा किया जाता है।
प्रकाश का प्रकीर्णन एवं आकाश का नीला रंग
रेले के प्रकीर्णन के नियम के आधार पर, प्रकाश के छोटे तरंगदैर्ध्य का प्रकीर्णन अधिक होता है। नीले रंग का तरंगदैर्ध्य कम होने के कारण वायुमंडल में यह सबसे अधिक प्रकीर्णित होता है, इसीलिए आकाश नीला दिखाई देता है। सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देने का कारण भी प्रकाश का प्रकीर्णन ही है।
प्रिज्म द्वारा प्रकाश का विक्षेपण एवं इंद्रधनुष का निर्माण
श्वेत प्रकाश जब प्रिज्म से गुजरता है तो सात रंगों के बैंड (वर्णक्रम) में विभक्त हो जाता है। इंद्रधनुष के निर्माण में वर्षा की बूंदें प्रिज्म का कार्य करती हैं। सूर्य का प्रकाश बूंदों में प्रवेश करने पर अपवर्तित होता है, आंतरिक परावर्तन होता है और फिर बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित होकर विभिन्न रंगों में अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाता है।
इन सभी टॉपिक्स पर दिए गए ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का नियमित अभ्यास करने से आप परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के पैटर्न से परिचित हो जाएंगे और अवधारणाओं पर पकड़ मजबूत कर पाएंगे।