Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 5 भारतमाता) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 5 भारतमाता) of Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) such as Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै), Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं), Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ), Chapter 4 स्वदेशी), Chapter 5 भारतमाता), Chapter 6 जनतंत्र का जन्म), Chapter 7 हिरोशिमा), Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या), Chapter 9 हमारी नींद), Chapter 10 अक्षर(ज्ञान), Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) and Chapter 12 मेरे बिना तुम प्रभु). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) |
| Chapter Name | Chapter 5 भारतमाता) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 12 |
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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 5 भारतमाता) Solutions
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कविता के साथ प्रश्न. कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि भारतमाता का कैसा चित्र प्रस्तुत करता है?
उत्तर-
कविता के पहले भाग में कवि सुमित्रानंदन पंत ने भारतमाता का एक उदास और दुखी चित्र प्रस्तुत किया है। वह भारतमाता को गाँवों में रहने वाली एक साधारण नारी के रूप में दिखाते हैं, जिसका आँचल धूल से सना हुआ है। उनकी आँखों से आँसू बह रहे हैं, जो गंगा-यमुना के प्रदूषित जल के समान हैं। जो धरती कभी फसलों से हरी-भरी और समृद्ध थी, आज वह म्लान और उदास दिखाई देती है। इस तरह कवि ने परतंत्र भारत की दयनीय दशा को भारतमाता के मानवीकृत रूप में चित्रित किया है।
प्रश्न 2, भारतमाता अपने ही घर में प्रवासिनी क्यों बनी हुई है ?
उत्तर-
कवि कहता है कि भारतमाता अपने ही देश में एक प्रवासिनी (मेहमान) की तरह रह रही हैं, क्योंकि उस समय भारत अंग्रेजों का गुलाम था। देश पर विदेशी शासन था, इसलिए भारत के लोग अपने ही घर में स्वतंत्र नहीं थे। उन्हें दूसरों के आदेशों का पालन करना पड़ता था। भारतमाता अपने बच्चों (यानी भारतीयों) पर हो रहे अत्याचार को चुपचाप देखने के लिए मजबूर थीं। अपनी ही धरती पर परायेपन का यह एहसास ही उन्हें प्रवासिनी बना देता है।
प्रश्न 3. कविता में कवि भारतवासियों का कैसा चित्र खींचता है ?
उत्तर-
कविता में कवि ने उस समय के भारतवासियों की बहुत ही दयनीय स्थिति का चित्र खींचा है। गुलामी के कारण वे गरीब, भूखे और नंगे रहने को मजबूर थे। शिक्षा और संस्कृति से दूर, वे अज्ञानता के अंधकार में डूबे हुए थे। कवि बताते हैं कि तीस करोड़ की आबादी शोषित, पीड़ित और वृक्षों के नीचे रहने वाली थी। एक समय जिस देश को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था, वहाँ के लोग अब दरिद्रता और दुख का जीवन जी रहे थे।
प्रश्न 4. भारतमाता का हास भी राहुग्रसित क्यों दिखाई पड़ता है ?
उत्तर-
कवि कहते हैं कि भारतमाता का हास (मुस्कान) भी राहुग्रसित (ग्रहण लगा हुआ) दिखाई देता है। राहु एक दैत्य है जो चंद्रमा को ग्रस लेता है, उसी तरह विदेशी आक्रमणकारियों और शासकों ने भारत की खुशियों और समृद्धि पर ग्रहण लगा दिया है। बार-बार की लूट और शोषण ने भारतमाता के चेहरे की मुस्कान छीन ली है। जिस प्रकार धरती सब कुछ सहन करती है, उसी प्रकार भारतमाता भी सब कुछ चुपचाप सह रही हैं, लेकिन उनकी यह मुस्कान अब दबी हुई और उदास है।
प्रश्न 5. कवि भारतमाता को गीता प्रकाशिनी मानकर भी ज्ञान मूठ क्यों कहता है २
उत्तर-
भारत को 'गीता प्रकाशिनी' कहा जाता है क्योंकि यहीं पर गीता जैसे ज्ञान के ग्रंथ की रचना हुई, जो पूरी दुनिया को ज्ञान और कर्म का पाठ पढ़ाती है। लेकिन कवि कहता है कि गुलामी के कारण भारत में अज्ञानता और अंधविश्वास फैल गया है। लोग अपने ही गौरवशाली ज्ञान को भूलकर दिशाहीन हो गए हैं। इसलिए, भले ही भारत ज्ञान का स्रोत है, लेकिन वर्तमान हालात में वह स्वयं अज्ञानता के अंधकार में डूबा हुआ प्रतीत होता है। यही कारण है कि कवि उसे 'ज्ञानमूढ़' (ज्ञान से वंचित) कहता है।
प्रश्न 6. कवि की दृष्टि में आज भारतमाता का तप-संयम क्यों सफल है ?
उत्तर-
कवि के अनुसार, भारतमाता का तप और संयम इसलिए सफल है क्योंकि इतने लंबे समय तक विदेशी शासन और शोषण को सहने के बाद भी उसने अपने मूल स्वभाव को नहीं खोया है। उसकी सहनशीलता, अहिंसा और 'वसुधैव कुटुम्बकम' (सारी दुनिया एक परिवार है) की भावना आज भी जीवित है। भारतमाता अपनी संतानों को आज भी प्रेम, सहिष्णुता और शांति का पाठ पढ़ाती है। यह उसके अटूट तप और संयम का ही परिणाम है कि भारतीय जनता ने हर कठिनाई को सहन करते हुए भी अपनी मानवीय संवेदनाएँ बरकरार रखी हैं।
प्रश्न 7. व्याख्या करें (क) स्वर्ण शस्य पर पद-तल-लुंठित, धरती-सा सहिष्णु मन कुंठित (ख) चिंतित भृकुटि क्षितिज तिमिरांकित, नमित नयन नम वाष्पाच्छादित।
उत्तर-
(क) व्याख्या: यह पंक्ति सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित 'भारतमाता' कविता से ली गई है। इसमें कवि परतंत्र भारत की दशा का वर्णन करते हैं। 'स्वर्ण शस्य' यानी सोने जैसी चमकती फसल, जो भारत की समृद्धि का प्रतीक है, उसे विदेशी शासकों के 'पद-तल' यानी पैरों तले रौंद दिया गया है। भारतमाता का मन धरती की तरह अत्यधिक सहनशील है, लेकिन इस दुखद स्थिति को देखकर वह कुंठित (दबा हुआ और निराश) हो गया है। कवि यहाँ भारत की लूट और उसकी विवश सहनशीलता को दर्शाते हैं।
(ख) व्याख्या: यह पंक्ति भी 'भारतमाता' कविता से है। कवि भारतमाता के चेहरे के भावों के माध्यम से देश की दुर्दशा को दिखाते हैं। 'चिंतित भृकुटि' यानी चिंता से भरी हुई भौहें, जो देश की चिंता को दर्शाती हैं। 'क्षितिज तिमिरांकित' का अर्थ है कि देश के भविष्य के क्षितिज पर अंधकार (गुलामी का दुख) छाया हुआ है। 'नमित नयन' यानी झुकी हुई आँखें और 'नम वाष्पाच्छादित' यानी आँसुओं की भाप से आच्छादित। इन पंक्तियों में कवि ने भारतमाता के दुख, चिंता और अश्रुपूर्ण मुद्रा का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है।
प्रश्न 8. कवि भारतमाता को गीता प्रकाशिनी मानकर भी ज्ञानमूढ़ क्यों कहता है?
उत्तर-
कवि इस विरोधाभास को दर्शाना चाहता है। भारत वह देश है जहाँ गीता जैसा ज्ञान का महान ग्रंथ प्रकट हुआ, जो कर्म और धर्म का सार बताता है। इसलिए वह 'गीता प्रकाशिनी' यानी ज्ञान की ज्योति फैलाने वाली है। लेकिन गुलामी के लंबे दौर ने देश को अज्ञानता, गरीबी और निराशा में धकेल दिया। लोग अपने गौरवशाली अतीत को भूल गए और शोषण की जिंदगी जीने लगे। ऐसी स्थिति में, भले ही भारत ज्ञान का स्रोत है, लेकिन वह स्वयं अज्ञान के अंधकार में डूबा हुआ प्रतीत होता है। इसीलिए कवि उसे 'ज्ञानमूढ़' कहकर इस दुखद विरोधाभास को उजागर करता है।
प्रश्न 9. भारतमाता कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
सुमित्रानंदन पंत की कविता 'भारतमाता' देश की परतंत्रता के दौर की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कवि ने भारत देश को एक माँ के रूप में चित्रित किया है जो गाँवों में निवास करती है। उनका आँचल धूल से सना हुआ है और आँखों से गंगा-यमुना के समान आँसू बह रहे हैं। कवि बताते हैं कि भारतमाता अपने ही घर में एक प्रवासिनी की तरह हैं क्योंकि देश गुलाम है। उनकी संतान यानी भारतवासी गरीबी, भूख और अज्ञानता में जी रहे हैं। भारतमाता का चेहरा चिंता और दुख से भरा हुआ है, उनकी मुस्कान पर भी ग्रहण लग गया है। कवि यह भी कहते हैं कि भारत जहाँ गीता जैसा ज्ञान देने वाला देश है, वहीं आज वह स्वयं अज्ञान के अंधकार में है। फिर भी, भारतमाता का तप और सहनशीलता अटूट है, जो देशवासियों को संघर्ष और मानवता का पाठ पढ़ाती रहती है। यह कविता देशप्रेम और दुख की एक संवेदनशील अभिव्यक्ति है।
प्रश्न 1.
कविता के अनुच्छेद में विशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग हुआ है। आप उनका चयन करें एवं वाक्य बनाएँ। ग्रामवासिनी, श्यामल, मैला, दैन्य, नत, नीरख। ।
विषण्ण, क्षुधित, चिर, मौन, चिंतित।
उत्तर-
ग्रामवासिनी - ग्रामवासिनी भारतमाता की सच्ची छवि है।
श्यामल - खेतों में फैली हरियाली उसका श्यामल है।
मैला - गरीबी और शोषण के कारण उसका आँचल मैला हो गया है।
दैन्य - परतंत्रता के कारण उसके जीवन में दैन्य छा गया है।
नत - दुःख और पीड़ा से उसका मस्तक नत है।
नीरव - विपदा के समय में वह नीरव रहती है।
विषण्ण - देश की दुर्दशा देखकर उसका मन विषण्ण हो उठता है।
क्षुधित - क्षुधित बच्चों को देखकर मन द्रवित हो जाता है।
चिर - उसके अधरों पर चिर दुःख की छाया है।
मौन - वेदना इतनी गहरी है कि उसने मौन धारण कर लिया है।
चिंतित - भविष्य की अनिश्चितता से वह सदैव चिंतित रहती है।
प्रश्न 2.
निम्नांकित के विग्रह करते हुए समास स्पष्ट करें ग्रामवासिनी, गंगा-यमुना, शरदेन्दु, दैत्यजड़ित, तिमिरांकित, बाष्पाच्छादित, ज्ञानमूढ़, तपसंयम, जन-मन भय, भव-तम-प्रम।
उत्तर-
ग्रामवासिनी - ग्राम में वास करने वाली (स्री) - तत्पुरुष समास
गंगा-यमुना - गंगा और यमुना - द्वंद्व समास
शरदेन्दु - शरद ऋतु का इंदु (चंद्रमा) - तत्पुरुष समास (षष्ठी तत्पुरुष)
दैत्यजड़ित - दैत्य से जड़ित (पीड़ित) - तत्पुरुष समास (तृतीया तत्पुरुष)
तिमिरांकित - तिमिर (अंधकार) से अंकित - तत्पुरुष समास (तृतीया तत्पुरुष)
बाष्पाच्छादित - बाष्प (आँसू) से आच्छादित (ढका हुआ) - तत्पुरुष समास (तृतीया तत्पुरुष)
ज्ञानमूढ़ - ज्ञान में मूढ़ (अज्ञानी) - तत्पुरुष समास (सप्तमी तत्पुरुष)
तपसंयम - तप में संयम - तत्पुरुष समास (सप्तमी तत्पुरुष)
जन-मन-भय - जन का मन और (उसमें) भय - द्वंद्व समास
भव-तम-प्रम - भव (संसार) का तम (अंधकार) और भ्रम - द्वंद्व समास
प्रश्न 3.
कविता से तद्भव शब्दों का चयन करें।
उत्तर-
कविता में प्रयुक्त कुछ तद्भव शब्द निम्नलिखित हैं:
भारतमाता, ग्रामवासिनी, खेतों, मैला, आँसू, मिट्टी, उदासिनी, रोदन, थरथर, तीस, मूढ़, निवासिनी, चिंतित।
(तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत शब्दों से बदलकर हिंदी में आए हैं।)
प्रश्न 4.
कविता से क्रियापद चुनें और उनका स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें।
उत्तर-
कविता से चुने गए कुछ क्रियापद (क्रिया शब्द) और उनके वाक्य प्रयोग:
नत - दुःख के भार से उसका सिर नत हो गया।
फैला - चारों ओर सुबह की रोशनी फैल गई।
क्रंदन - बच्चे का क्रंदन सुनकर माँ दौड़ी आई।
पिला - माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।
हरती - प्रकृति की गोद सबका दुःख हरती है।
काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. भारतमाता ग्रामवासिनी खेतों में फैला है श्यामल
घूल-भरा मैला-सा आँचल गंगा-यमुना में आँसू-जल
मिट्टी की प्रतिमा
उदासिनी !
दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन, अधरों में चिर नीरव रोदन, युग-युग के तप से विषण्ण मन वह अपने घर में
प्रवासिनी!
प्रश्न (क) कवि एवं कविता का नाम लिखें।
उत्तर-
कविता का नाम: भारतमाता
कवि का नाम: सुमित्रानंदन पंत
(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखें।
उत्तर-
प्रस्तुत पद्यांश सुमित्रानंदन पंत की कविता 'भारतमाता' से लिया गया है। इस अंश में कवि ने परतंत्र भारत की दयनीय दशा का मार्मिक चित्रण किया है। भारतमाता को ग्रामवासिनी के रूप में चित्रित करके कवि यह बताना चाहते हैं कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी, शोषित और उपेक्षित भारतमाता की वेदना, उसकी निराशा और अपने ही घर में परदेशी जैसी अनुभूति को कवि ने बहुत ही संवेदनशील ढंग से व्यक्त किया है।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
उत्तर-
कवि कहते हैं कि हमारी भारतमाता गाँवों में निवास करने वाली हैं। उनका श्यामल (हरा-भरा) शरीर खेतों में फैली हरियाली के समान है। उनका आँचल धूल से मैला-सा पड़ गया है और गंगा-यमुना के जल के रूप में उनके आँसू बह रहे हैं। वे मिट्टी की बनी एक उदास प्रतिमा-सी बैठी हैं।
उनकी दृष्टि दीनता से भरी, बिना पलक झपकाए, नीचे झुकी हुई है। उनके होंठों पर सदियों से चला आ रहा मौन रुदन (रोना) है। युगों-युगों के कष्ट सहने से उनका मन दुखी और उदास हो गया है। ऐसा लगता है कि वे अपने ही घर में एक परदेशिन (प्रवासिनी) बनकर रह गई हैं।
(घ) पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी है। कवि ने सम्पूर्ण भारत देश को एक माता के रूप में चित्रित किया है और उसकी परतंत्रता की पीड़ा को एक सामान्य भारतीय नारी की वेदना के माध्यम से व्यक्त किया है। 'ग्रामवासिनी' शब्द का प्रयोग भारत की ग्राम-प्रधान संस्कृति और उसकी सादगी को दर्शाता है। 'मिट्टी की प्रतिमा' और 'उदासिनी' जैसे बिंब देश की निष्क्रिय और निराशाजनक स्थिति को प्रकट करते हैं। 'अपने घर में प्रवासिनी' का भाव देशवासियों पर विदेशी शासन के कारण उत्पन्न अन्याय और विस्थापन की भावना को दर्शाता है। सम्पूर्ण भाव देशभक्ति और करुणा से ओत-प्रोत है।
(ड) पद्यांश का काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
1. भाषा शैली: कवि ने खड़ी बोली में सरल, मधुर एवं भावपूर्ण भाषा का प्रयोग किया है। शब्दों का चयन अत्यंत सटीक और प्रभावशाली है।
2. छंद योजना: पद्यांश मुक्त छंद में है, जिससे भावों की अभिव्यक्ति में स्वाभाविकता और गति आई है।
3. अलंकार योजना:
- मानवीकरण: पूरी कविता में भारतमाता, प्रकृति और नदियों का मानवीकरण किया गया है।
- उपमा: 'मिट्टी की प्रतिमा' में भारतमाता की तुलना मिट्टी की मूर्ति से की गई है।
- रूपक: 'गंगा-यमुना में आँसू-जल' में नदियों के जल को आँसू के रूप में देखा गया है।
4. बिंब योजना: 'श्यामल खेत', 'मैला आँचल', 'नत चितवन', 'नीरव रोदन' जैसे सजीव बिंब कविता को चित्रात्मक बना देते हैं।
5. संगीतात्मकता: भाषा में एक लय और संगीत है जो पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।
6. रस: पूरे पद्यांश में करुण रस की प्रधानता है, जो देश की दुर्दशा से उत्पन्न होता है।
प्रश्न (क) कविता एवं कवि का नाम लिखें।
उत्तर: कविता का नाम भारतमाता है। इसके कवि सुमित्रानंदन पंत जी हैं।
(ख) पद्चांश का प्रसंग लिखें।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश में कवि सुमित्रानंदन पंत ने अंग्रेजी शासन के अधीन गुलाम भारत की दयनीय स्थिति का वर्णन किया है। उन्होंने भारतमाता के रूप में देश की पीड़ा, गरीबी, अशिक्षा और शोषण को दर्शाया है। यहाँ भारतमाता वृक्ष के नीचे बैठी एक दुखी माँ के रूप में चित्रित हैं, जिनके बच्चे (भारतवासी) नग्न, भूखे और निराश्रित हैं।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
उत्तर: कवि कहते हैं कि भारत की तीस करोड़ संतान (जनता) नग्न शरीर वाली, आधे पेट भोजन वाली, शोषित, निहत्थी, मूर्ख, असभ्य, अशिक्षित और निर्धन है। वे सिर झुकाए वृक्षों के नीचे रहने वाली भारतमाता के पास हैं। सोने जैसी चमकती फसलें दूसरों के पैरों तले रौंदी जा रही हैं, परंतु भारतमाता धरती की तरह सहनशील हैं। उनका मन दुख से भरा है, होंठ काँप रहे हैं, मुस्कान मौन हो गई है और वे राहु ग्रस्त चंद्रमा की तरह दिख रही हैं।
(घ) पद्चांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी है। कवि ने पराधीन भारत की वेदना को भारतमाता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। तीस करोड़ लोगों की दुर्दशा का चित्रण करके उनकी पीड़ा को साकार किया गया है। भारतमाता की सहनशीलता, मौन वेदना और ग्रस्त स्थिति से पाठक के मन में देशभक्ति और करुणा के भाव जागृत होते हैं। यह चित्रण स्वतंत्रता पूर्व के भारत की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है।
(ड) पद्चांश का काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पद्यांश का काव्य सौंदर्य निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है:
1. भाषा: खड़ी बोली हिंदी का सुंदर प्रयोग है, जिसमें तत्सम शब्दों की प्रधानता है।
2. अलंकार: 'राहु ग्रसित शरदेन्दु' में रूपक अलंकार है। 'स्वर्ण शस्य' में उपमा का सुंदर प्रयोग हुआ है।
3. छंद एवं लय: पद्य में एक मधुर लय और संगीतात्मकता है जो भावों को और प्रभावशाली बनाती है।
4. चित्रात्मकता: 'नत मस्तक तरू-तल निवासिनी' जैसे पदों से एक सजीव मानसिक चित्र उभरता है।
5. प्रतीकात्मकता: 'भारतमाता' देश की प्रतीक हैं, 'स्वर्ण शस्य' देश की संपदा का प्रतीक है और 'राहु' विदेशी शासन का प्रतीक है।
प्रश्न (क) कवि एवं कविता का नाम लिखें।
उत्तर: कविता का नाम भारतमाता है तथा कवि का नाम सुमित्रानंदन पंत है।
(ख) पद्चांश का प्रसंग लिखें।
उत्तर: इस पद्यांश में कवि ने भारतमाता की वर्तमान (उस समय की) चिंताग्रस्त मनोदशा का वर्णन किया है। परतंत्रता के कारण पूरा देश अंधकार में डूबा हुआ है, लोगों के चेहरे उदास हैं, परंतु फिर भी भारतमाता अपने तप, संयम और अहिंसा के गुणों से जनमन के भय और भ्रम को दूर करने वाली जगजननी बनी हुई हैं। यहाँ देश की दुर्दशा और उसकी अमर आत्मा दोनों का चित्रण है।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
उत्तर: भारतमाता की भौंहें चिंता से सिकुड़ी हुई हैं, पूरा क्षितिज अंधकार से घिरा है, लोगों के नेत्र नम हैं और हृदयरूपी आकाश दुखरूपी बादलों से ढका है। उनका मुख चंद्रमा की छाया के समान मलिन और उदास है। वही भारतमाता जो अज्ञान को मिटाने वाली गीता का प्रकाश फैलाने वाली थी, आज स्वयं अज्ञान के अंधकार में है।
लेकिन आज उनका तप और संयम सफल हुआ है। उनका अहिंसारूपी स्तन्य (दूध) अमृत के समान है जो लोगों के मन का भय, संसार का अंधकार और भ्रम दूर करता है। वह समस्त जगत की माता और जीवन की विकास करने वाली शक्ति हैं।
(घ) पद्चांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य गहन चिंतन और आशावादिता से भरा है। पहले भाग में गुलामी के कारण देश की उदासी, निराशा और अंधकार का मार्मिक वर्णन है। 'चिंतित भूकुटि', 'नमित नयन' जैसे बिंब दुख को स्पर्श करते हैं। दूसरे भाग में निराशा के बीच आशा की किरण दिखाई देती है। भारतमाता के 'तप संयम' और 'अहिंसा स्तन्य' के माध्यम से कवि यह विश्वास दिलाते हैं कि देश की आत्मा अजेय है और वह अंततः अंधकार को मिटाकर जीवन का विकास करेगी। यह भाव देशप्रेम और आस्था से ओत-प्रोत है।
(ड) पद्चांश का काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पद्यांश के काव्य सौंदर्य की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. भाषा-शैली: संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है। भाव के अनुरूप भाषा गंभीर और प्रभावशाली बन पड़ी है।
2. अलंकार: 'छाया-शशि उपमित' में उपमा अलंकार है। 'जग-जननी' और 'जीवन-विकासिनी' में अनुप्रास अलंकार की छटा है। पूरे पद्यांश में भारतमाता का मानवीकरण किया गया है।
3. प्रतीक योजना: 'तिमिर' गुलामी के अंधकार का, 'गीता' ज्ञान का, 'अहिंसा स्तन्य' शांति और सद्भाव का, और 'भव-तम' दुखों के संसार का प्रतीक है।
4. बिंब योजना: 'चिंतित भूकुटि', 'नमित नयन', 'वाष्पाच्छादित नभ' जैसे दृश्य बिंब पाठक के सामने एक सजीव चित्र उपस्थित कर देते हैं।
5. संगीतात्मकता: छंदबद्ध रचना होने के कारण इसमें एक स्वाभाविक लय और संगीत है जो कविता को मनोहर बनाती है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. भारत माता' किस कवि की रचना है ? या भारत माता' के रचयिता कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) प्रेमधन
(ग) सुमित्रानन्दन पंत
(घ) कुंवर नारायण
प्रश्न 2. सुमित्रानन्दन पंत कैसे कवि हैं
(क) हालावादी
(ख) छायावादी
(ग) रीतिवादी
(घ) क्षणवादी
प्रश्न 3. पंतजी की भारत माता कहाँ की निवासिनी है ?
(क) ग्रामवासिनी
(ख) नगरवासिनी
(ग) शहरवासिंनी
(घ) पर्वतवासिनी
प्रश्न 4. भारत माता का आँचल कैसा है ?
(क) नीला
(ख) लाल
(ग) गीला
(घ) घूल भरा
प्रश्न 5. भारत माता' कविता कवि के किस काव्य-ग्रंथ से संकलित है?...
(क) वीणा
(ख) ग्रंथि
(ग) ग्राम्या
(घ) उच्छवास
प्रश्न 6. पंतज़ी का मूल नाम क्या था?
(क) गोसाई दत्त
(ख) सुमित्रानंदन
(ग) नित्यानंद पंत
(घ) परमेश्वर दत्त पंत
॥. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
प्रश्न 1.
पंतजी को उनकी साहित्य-सेवा के-लिए भारत सरकार ने उत्तर-
उत्तर: भारत सरकार ने पंतजी की साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया था।
प्रश्न 2.
.--------- पर पंतजी को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। उत्तर-
उत्तर: पंतजी को उनकी काव्य रचना 'चिदंबरा' पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
प्रश्न 3.
पंतजी मूलत: ........... और सौंदर्य के कवि हैं। उत्तर-
उत्तर: पंतजी मूलत: प्रकृति और सौंदर्य के कवि हैं।
प्रश्न 4.
कवि के अनुसार गंगा-यमुना के जल ........ के आँसू हैं। उत्तर-
उत्तर: कवि के अनुसार गंगा-यमुना का जल भारतमाता के आँसू हैं।
प्रश्न 5.
पंतजी का जन्म अल्मोड़ा जिला के ......... में हुआ था। उत्तर-
उत्तर: पंतजी का जन्म अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक स्थान पर हुआ था।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
पंतजी ने अपनी कविताओं में प्रकृति के किस पक्ष का उद्धाठन किया है ?
उत्तर: पंतजी ने अपनी कविताओं में प्रकृति के कोमल, सुंदर और मनोहर पक्ष का उद्घाटन किया है। उन्होंने प्रकृति की सूक्ष्म सुंदरता और उसके मानवीय संबंधों को अपनी कविता का विषय बनाया है।
प्रश्न 2.
'भारत माता' कविता पर किस विचारधारा का प्रभाव है ?
उत्तर: 'भारत माता' कविता पर प्रगतिवादी विचारधारा का स्पष्ट प्रभाव है। इस कविता में समाज के शोषित, गरीब और पीड़ित वर्ग की स्थिति का यथार्थ चित्रण है, जो प्रगतिवाद का मुख्य लक्षण है।
प्रश्न 3.
कवि पंत के 'भारत माता' कविता में किस काल के भारत का चित्रण है ?
उत्तर: कवि पंत की 'भारत माता' कविता में पराधीनता के काल (ब्रिटिश शासन काल) के भारत का मार्मिक चित्रण है। इसमें उस समय की गरीबी, शोषण और दुःखद सामाजिक स्थितियों को दर्शाया गया है।
प्रश्न 4.
'भारत माता' कविता में भारत के किस रूप का उल्लेख है ?
उत्तर: 'भारत माता' कविता में भारत के दीन-हीन, शोषित और पीड़ित रूप का उल्लेख है। कवि ने भारतमाता को एक ग्रामवासिनी, उदास और कष्टों से घिरी हुई माँ के रूप में चित्रित किया है।
प्रश्न 5.
'भारत माता' कविता में कैसी शब्दावली का प्रयोग किया गया है ?
उत्तर: 'भारत माता' कविता में मुख्य रूप से तत्सम प्रधान, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग किया गया है। इससे कविता को गंभीरता, प्रभावशीलता और एक विशिष्ट सौंदर्य प्राप्त हुआ है।
व्याख्या खण्ड
प्रश्न 1.
“भारत माता ग्रामवासनी
खेतों में फैला है श्यामल,
धूल-भरा मैला-सा आँचल
गंगा-यमुना में आँसू जल
मिट्टी की प्रतिमा
उदासिनी !”
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता 'भारत माता' से ली गई हैं। कवि कहता है कि भारतमाता का वास गाँवों में है। उसकी हरियाली और सुंदरता खेतों में फैले श्यामल (हरे) रूप में दिखाई देती है। परंतु उनका आँचल धूल से मैला-सा पड़ा है, जो ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों का प्रतीक है। गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों का जल भी माता के आँसुओं के समान प्रतीत होता है। वह मिट्टी की बनी एक ऐसी मूर्ति हैं जो सारे गुणों से संपन्न होते हुए भी उदास बैठी हैं। कवि का प्रश्न है कि इतना सब कुछ होते हुए भी उनके चेहरे पर उदासी क्यों है? इन पंक्तियों के माध्यम से कवि यह दर्शाना चाहता है कि प्राकृतिक संपदा से भरपूर होने के बावजूद भारत की जनता अभाव, बेरोजगारी और दुःख में क्यों जी रही है।
प्रश्न 2.
“दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन
अधरों में चिर नीरव रोदन,
युग-युग के तम से विषण्ण मन,
वह अपने घर में
प्रवासिनी!
व्याख्या-
ये पंक्तियाँ 'भारत माता' कविता से हैं। कवि भारतमाता की दयनीय दशा का वर्णन करते हुए कहता है कि उनकी दृष्टि दीनता से भरी हुई है और आँखें बिना पलक झपकाए नीचे की ओर झुकी हैं। उनके होंठों पर सदियों से चला आ रहा मौन रोदन (चुपचाप रोना) है। उनका मन युगों-युगों के अंधकार (दुःखों) से दुखी और मलिन हो गया है। विडंबना यह है कि वह अपने ही घर में एक परदेशिनी (अजनबी) की तरह रह रही हैं। अर्थात्, भारत अपनी ही धरती पर गुलामी और शोषण का जीवन जीने को मजबूर है। इन पंक्तियों में कवि ने भारतमाता का मानवीकरण करके उनकी पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है, जो समस्त भारतीय जनता के दुःखों का प्रतिनिधित्व करती है।
प्रश्न 3.
तीस कोटि संतान नग्न तन,
अर्ध क्षुधित, शोषित, निरस्त्रजन,
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नत मस्तक,
तरु-तल निवासिनी!
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने उस समय की भारतीय जनता (तीस करोड़ संतान) की दयनीय स्थिति का चित्र खींचा है। वे कहते हैं कि माता की ये संतानें नंगे बदन, आधे पेट भोजन पाकर, शोषण का शिकार और बिना किसी हथियार (शक्ति) के हैं। वे अज्ञानी, असभ्य, बिना शिक्षा के और गरीब हैं। उनके सिर शर्म या हताशा से झुके हुए हैं और वे पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर हैं। 'तरु-तल निवासिनी' कहकर कवि ने उस समय की ग्रामीण जनता की बेघरबार और अत्यंत गरीब स्थिति की ओर संकेत किया है। ये पंक्तियाँ भारतमाता की विवशता और उनकी संतानों के कष्टों का सटीक चित्रण करती हैं।
प्रश्न 4.
स्वर्ण शस्य पद-तल लुंठित,
धरती-सा सहिष्णु मन कुंठित,
करुण क्रंदन में अधर कंपित,
राहु-ग्रसित
शरदेन्दु हासिनी! ”
व्याख्या-
इन पंक्तियों में कवि विरोधाभास दिखाते हुए कहता है कि भारतमाता स्वर्णिम फसलों (संपदा) वाली भूमि हैं, पर उन्हें पैरों तले रौंद दिया गया है। उनका मन धरती की तरह अत्यंत सहनशील है, फिर भी वह कुंठा (निराशा) से भरा हुआ है। करुणा के रोदन से उनके होंठ काँप रहे हैं। उनकी हँसी, जो शरद ऋतु के चंद्रमा जैसी मनमोहक होनी चाहिए, वह राहु द्वारा ग्रसित (ग्रहण लगे चाँद) की तरह मलिन और अवरुद्ध हो गई है। अर्थात्, उनकी खुशी और आशा पर विपत्तियों का अंधकार छा गया है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने भारत की विडंबनापूर्ण स्थिति – संपन्नता के बीच गरीबी, सहनशीलता के बीच निराशा – को बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है।
प्रश्न 5.
चिंतित भूकुटी क्षितिज तिमिरांकित,
नमित नयन नभ वाष्पाच्छादित,
आनन श्री छाया-शशि उपमित
ज्ञान मूढ़
गीता प्रकाशिनी!
व्याख्या-
अंतिम पंक्तियों में कवि भारतमाता के मुखमंडल का वर्णन करता है। उनकी चिंतित भौहें अंधकार से घिरे क्षितिज के समान प्रतीत होती हैं। उनकी झुकी हुई आँखें बादलों (वाष्प) से ढके आकाश के समान हैं। उनके मुख की शोभा छाया में डूबे चंद्रमा के समान मलिन है। यहाँ एक बड़ा विरोधाभास है – वह स्वयं गीता जैसे ज्ञान के उच्चतम ग्रंथ की प्रकाशक (ज्ञान देने वाली) हैं, परंतु आज उनकी अपनी संतानें अज्ञान (मूढ़) में डूबी हुई हैं। इन पंक्तियों के द्वारा कवि यह संदेश देता है कि भारत ज्ञान और आध्यात्मिकता की भूमि है, लेकिन पराधीनता के कारण उसकी जनता अज्ञान और निराशा के अंधकार में जी रही है।
भारतमाता (पद्य खण्ड) - प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. ‘भारतमाता’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: ‘भारतमाता’ कविता के कवि जयशंकर प्रसाद हैं। ये हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ हैं और अपनी गहन देशभक्ति एवं राष्ट्रीय चेतना से भरी रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 2. भारतमाता कहाँ विराजमान हैं?
उत्तर: कवि के अनुसार, भारतमाता ग्रामों में विराजमान हैं। वह साधारण झोंपड़ियों में निवास करने वाली, खेतों में काम करने वाली किसान स्त्री के रूप में हमारे सामने प्रकट होती हैं। उनका स्वरूप शहरी वैभव में नहीं, बल्कि ग्रामीण सादगी और श्रम में निहित है।
प्रश्न 3. भारतमाता का स्वरूप कैसा है?
उत्तर: भारतमाता का स्वरूप अत्यंत साधारण, श्रमशील और ममतामयी है। वह हाथ में हल्थला (हल का फाल) लिए खेत जोतती हैं और सिर पर मिट्टी का घड़ा (कुंभ) रखकर पानी भरती हैं। उनके वस्त्र साधारण हैं और वह ग्रामीण जीवन की प्रतिनिधि एक कृषक महिला के रूप में दिखाई देती हैं, जो अपने सादगीपूर्ण जीवन से ही देश की आत्मा को प्रकट करती हैं।
प्रश्न 4. भारतमाता के गहने कौन-कौन से हैं?
उत्तर: भारतमाता के गहने उनके श्रम और प्राकृतिक सौंदर्य से बने हैं। उनके गहने पारंपरिक सोने-चाँदी के आभूषण नहीं हैं। उनके कंगन खेतों की मेड़ (सीमा) के समान हैं, मुकुट आकाश के तारों से सजा है और बाजूबंद सूर्य व चंद्रमा के प्रकाश से बने हैं। ये प्रतीकात्मक गहने उनकी विशालता और दिव्यता को दर्शाते हैं।
प्रश्न 5. भारतमाता के हाथों में क्या है?
उत्तर: भारतमाता के हाथों में हल्थला (हल का फाल या नोक) है। यह हल्थला उनके श्रमशील, उत्पादक और कृषि-प्रधान स्वरूप का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि भारत की वास्तविक शक्ति और समृद्धि उसकी धरती और उस पर काम करने वाले किसानों से आती है।
प्रश्न 6. भारतमाता के माथे पर किसका तिलक है?
उत्तर: भारतमाता के माथे पर हिमालय का तिलक है। हिमालय पर्वत भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और इसे देश का मुकुट माना जाता है। इसे तिलक के रूप में चित्रित करके कवि ने हिमालय की गरिमा और पवित्रता को भारतमाता के सौंदर्य व गौरव का अभिन्न अंग बना दिया है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. ‘भारतमाता’ कविता के कवि हैं-
A. सुमित्रानंदन पंत
B. महादेवी वर्मा
C. जयशंकर प्रसाद
D. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर: C. जयशंकर प्रसाद
2. भारतमाता कहाँ विराजमान हैं?
A. नगरों में
B. ग्रामों में
C. पर्वतों में
D. वनों में
उत्तर: B. ग्रामों में
3. भारतमाता के हाथों में क्या है?
A. तलवार
B. हल्थला
C. झंडा
D. त्रिशूल
उत्तर: B. हल्थला
4. भारतमाता के माथे पर किसका तिलक है?
A. हिमालय
B. गंगा
C. सूर्य
D. चंद्रमा
उत्तर: A. हिमालय
5. भारतमाता के कंगन किसके बने हैं?
A. सीपियों के
B. मेड़ के
C. हीरों के
D. मोतियों के
उत्तर: B. मेड़ के
भारतमाता (पद्य खण्ड) - समाधान
प्रश्न 1. भारतमाता कहाँ-कहाँ निवास करती है ?
भारतमाता का निवास केवल शहरों या गाँवों में नहीं है। वह हमारे देश के हर कोने में विद्यमान हैं। वह गाँवों की चौपालों में, खेतों की मेड़ों पर, खलिहानों में और जंगलों में रहने वाले लोगों के बीच भी निवास करती हैं। साथ ही, वह शहरों के मजदूरों, कारीगरों और सभी कर्मठ नागरिकों के हृदय में भी बसती हैं।
प्रश्न 2. भारतमाता ग्रामवासिनी हैं- इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
इस पंक्ति का आशय यह है कि भारतमाता का मुख्य और वास्तविक स्वरूप गाँवों में ही देखने को मिलता है। भारत की आत्मा और संस्कृति का केंद्र उसके गाँव हैं। देश की अधिकांश जनता गाँवों में निवास करती है और वहीं पर देश की सच्ची तस्वीर दिखाई देती है। इसलिए कवि कहते हैं कि भारतमाता मूल रूप से ग्रामवासिनी, यानी गाँव में रहने वाली हैं।
प्रश्न 3. भारतमाता के हाथों में क्या शोभा पाता है ?
भारतमाता के हाथों में सादगी और मेहनत की प्रतीक वस्तुएँ शोभा पाती हैं। उनके हाथों में कुआँरी (मिट्टी का घड़ा) और कलश सुशोभित है, जो पवित्रता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। साथ ही, उनके हाथों में हल भी शोभा पाता है, जो कृषि प्रधान देश होने और मेहनत से अन्न उपजाने के संकेत को दर्शाता है।
प्रश्न 4. भारतमाता का स्वरूप कैसा है ?
भारतमाता का स्वरूप एक साधारण, करुणामयी और ममतामयी ग्रामीण माँ जैसा है। उनका शरीर दुर्बल (कमजोर) है क्योंकि वे लंबे समय तक विपदाओं और दुखों को सहती रही हैं। उनके हाथों में कलश और हल है तथा वे गाँव की मेड़ पर खड़ी हुई हैं। उनका यह स्वरूप हमें उनकी सादगी, कठिनाइयों और फिर भी अटूट आशा के दर्शन कराता है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किसी एक का आशय स्पष्ट करें-
(क) हमारी जन्मभूमि, पुण्यभूमि, स्वर्गभूमि यही।
(ख) हम सब उसके हैं, वह सबकी है।
(क) आशय: इस पंक्ति का आशय है कि हमारा देश भारत हमारी जन्मभूमि (जहाँ हम पैदा हुए), पुण्यभूमि (पवित्र भूमि जहाँ पुण्य कमाया जा सकता है) और स्वर्गभूमि (स्वर्ग के समान सुंदर और प्रिय भूमि) है। कवि कहना चाहते हैं कि हमारे लिए इससे बढ़कर कोई और पवित्र या प्रिय स्थान नहीं हो सकता।
(ख) आशय: इस पंक्ति का आशय है कि भारतमाता और उसके निवासियों के बीच एक अटूट और पारस्परिक संबंध है। देश के सभी नागरिक भारतमाता की संतान हैं, इसलिए "हम सब उसके हैं"। और साथ ही, भारतमाता किसी एक की नहीं बल्कि सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों की समान रूप से माँ है, इसलिए "वह सबकी है"।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
1. 'भारतमाता' कविता के रचयिता हैं-
A. सुमित्रानंदन पंत
B. रामधारी सिंह 'दिनकर'
C. मैथिलीशरण गुप्त
D. जयशंकर प्रसाद
2. भारतमाता कहाँ निवास करती है ?
A. केवल गाँव में
B. केवल शहर में
C. गाँव और शहर दोनों में
D. पर्वतों में
3. भारतमाता के हाथ में क्या है ?
A. तलवार और ढाल
B. कलश और हल
C. पुस्तक और कलम
D. फूल और माला
4. 'भारतमाता' कविता में भारतमाता का स्वरूप कैसा दिखाया गया है ?
A. राजसी और वैभवशाली
B. दुर्बल और ग्रामवासिनी
C. डरावना और क्रोधित
D. हँसमुख और नृत्यरत
5. 'हम सब उसके हैं, वह सबकी है' - पंक्ति में 'वह' शब्द किसके लिए आया है ?
A. कवि के लिए
B. भारतमाता के लिए
C. गाँव के लिए
D. प्रकृति के लिए
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