Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 9 हमारी नींद) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) |
| Chapter Name | Chapter 9 हमारी नींद) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 12 |
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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 9 हमारी नींद) Solutions
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1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- कवि नींद को अपनी बहन मानता है।
- कवि नींद को अपनी माँ मानता है।
- कवि नींद को अपनी सहेली मानता है।
- कवि नींद को अपनी पुत्री मानता है।
कवि ने नींद को माँ का दर्जा दिया है क्योंकि जिस तरह माँ अपने बच्चे को सुलाकर उसे सुकून और सुरक्षा देती है, ठीक उसी तरह नींद भी हमें थकान और चिंताओं से मुक्त करके शांति और नई ऊर्जा प्रदान करती है।
2. कवि ने नींद को किसके समान बताया है?
- बहन के समान
- माँ के समान
- सहेली के समान
- पुत्री के समान
कवि ने नींद की तुलना माँ से की है क्योंकि दोनों ही हमारी पीड़ा और थकान को दूर करके सुखद आराम देते हैं। नींद हमारे मन-मस्तिष्क को शांत करती है, जैसे माँ अपने बच्चे को चुप कराती है।
3. कवि ने नींद को क्या कहा है?
- बहन
- माँ
- सहेली
- पुत्री
कवि ने नींद को 'माँ' कहकर संबोधित किया है। यह संबोधन नींद के प्रति कवि के गहरे लगाव और सम्मान को दर्शाता है, क्योंकि माँ की तरह ही नींद भी हमारी सभी व्यथाओं को हर लेती है।
4. नींद किसके समान है?
- बहन के समान
- माँ के समान
- सहेली के समान
- पुत्री के समान
नींद माँ के समान है क्योंकि यह हमारे जीवन में सुख, शांति और ताजगी लाती है। जिस प्रकार माँ का स्नेह हमें सुरक्षित महसूस कराता है, उसी प्रकार गहरी नींद हमें सभी तनावों से मुक्त कर देती है।
5. कवि ने नींद को किस रूप में देखा है?
- बहन के रूप में
- माँ के रूप में
- सहेली के रूप में
- पुत्री के रूप में
कवि ने नींद को माँ के रूप में देखा और अनुभव किया है। उनके लिए नींद केवल शारीरिक आराम नहीं, बल्कि एक स्नेहिल और सुरक्षात्मक शक्ति है जो माँ के आँचल की तरह सुकून देती है।
6. नींद क्या है?
- बहन
- माँ
- सहेली
- पुत्री
इस कविता के संदर्भ में, नींद 'माँ' है। यह एक रूपक है जिसके माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि जीवन की सभी कठिनाइयों और थकान के बीच नींद ही वह माँ है जो हमें सहजता से सुला देती है और नई सुबह के लिए तैयार करती है।
7. कवि ने नींद को किसकी संज्ञा दी है?
- बहन की
- माँ की
- सहेली की
- पुत्री की
कवि ने नींद को 'माँ' की संज्ञा दी है। यह नींद के प्रति कवि की भावनात्मक निर्भरता और कृतज्ञता को दर्शाता है। माँ की गोद की तरह नींद भी एक ऐसा आश्रय है जहाँ हम सब कुछ भूलकर गहरी शांति पाते हैं।
8. नींद कवि के लिए क्या है?
- बहन
- माँ
- सहेली
- पुत्री
कवि के लिए नींद एक माँ के समान है। यह उसकी सभी चिंताओं और दुखों को दूर करके उसे आत्मिक शांति और नव-ऊर्जा प्रदान करती है, जो जीवन को सहज और सुखद बनाने के लिए आवश्यक है।
हमारी नींद (कविता)
कवि: केदारनाथ सिंह
1 कवि ने किसकी नींद की बात की है?
2 'हमारी नींद' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
3 'हमारी नींद' कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
4 'हमारी नींद' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने किन-किन समस्याओं की ओर संकेत किया है?
- गरीबी और भुखमरी: समाज का एक बड़ा वर्ग भूखा और गरीब है, जबकि दूसरा वर्ग विलासिता में डूबा है।
- शोषण और अन्याय: शक्तिशाली लोग कमजोरों का शोषण कर रहे हैं और अन्याय का बोलबाला है।
- संवेदनहीनता: लोगों ने दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति अपनी संवेदनाएँ खो दी हैं।
- आलस्य और उदासीनता: लोग सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने के बजाय आलस्य और उदासीनता की नींद में सोए हुए हैं।
- नैतिक पतन: स्वार्थ और भौतिकवाद के कारण मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है।
5 'हमारी नींद' कविता के आधार पर बताइए कि कवि किस प्रकार की नींद सोया है?
6 'हमारी नींद' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने किन-किन विषमताओं की ओर संकेत किया है?
- आर्थिक विषमता: एक ओर कुछ लोगों के पास धन का अंबार है, तो दूसरी ओर लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।
- सामाजिक विषमता: समाज शोषक और शोषित वर्ग में बंटा हुआ है। शक्तिशाली कमजोरों पर अत्याचार करते हैं।
- संवेदनात्मक विषमता: कुछ लोग इतने संवेदनशून्य हो गए हैं कि दूसरों का दर्द उन्हें छूता तक नहीं, जबकि कुछ लोग पीड़ित हैं।
- चेतना की विषमता: कुछ लोग सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक हैं, जबकि अधिकांश लोग उदासीनता की नींद में सोए हुए हैं।
7 'हमारी नींद' कविता के आधार पर बताइए कि कवि किससे और क्या पूछता है?
8 बहुविकल्पीय प्रश्न
i. 'हमारी नींद' कविता के रचयिता हैं-
सही उत्तर: (ग) केदारनाथ सिंह
ii. 'हमारी नींद' कविता में कवि ने किस पर व्यंग्य किया है?
सही उत्तर: (ग) समाज की उदासीनता पर
व्याख्या: कवि ने समाज के उन लोगों की उदासीनता और संवेदनहीनता पर व्यंग्य किया है जो सामाजिक समस्याओं के प्रति आँखें मूंदे हुए हैं।
iii. 'हमारी नींद' कविता का प्रमुख उद्देश्य है-
सही उत्तर: (ख) जागरूकता पैदा करना
व्याख्या: कविता का मुख्य उद्देश्य पाठकों में सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें उदासीनता की नींद से जगाना है।
iv. कवि के अनुसार 'हमारी नींद' कैसी है?
सही उत्तर: (ख) गहरी और लंबी
व्याख्या: कवि कहता है कि हमारी नींद इतनी गहरी और लंबी है कि हम अपने चारों ओर हो रही घटनाओं से बेखबर हैं। यह नींद हमें सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर करती है।
v. 'हमारी नींद' कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है?
सही उत्तर: (ख) अकाल और उसके बाद
व्याख्या: यह कविता केदारनाथ सिंह के प्रसिद्ध काव्य-संग्रह 'अकाल और उसके बाद' से संकलित है, जिसमें उन्होंने सामाजिक यथार्थ को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
सभी उत्तर पाठ्यपुस्तक के आधार पर तैयार किए गए हैं।
हमारी नींद (कविता)
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(क) कवि ने किस नींद की बात की है और वह कैसी है?
कवि ने उस आलस्यपूर्ण, गहरी और लंबी नींद की बात की है जिसमें हम सोए हुए हैं। यह नींद सामाजिक बुराइयों, अन्याय और शोषण के प्रति हमारी उदासीनता और जागरूकता की कमी का प्रतीक है। यह नींद ऐसी है कि इसमें सोया हुआ व्यक्ति अपने आस-पास हो रहे अत्याचारों और समस्याओं को न तो देख पाता है और न ही उनके विरोध के लिए जाग पाता है।
(ख) कवि ने किन-किन दृश्यों का वर्णन किया है?
कवि ने कई मार्मिक और चिंताजनक दृश्यों का वर्णन किया है, जैसे:
- एक बूढ़ी माँ का अपने ही बेटे के हाथों पिटाई खाना।
- एक बहन का अपने ही भाई के द्वारा बेचा जाना।
- एक पत्नी का अपने पति के हाथों अपमानित होना।
- समाज में फैली गरीबी, भुखमरी और दुःख के दृश्य।
ये सभी दृश्य हमारे समाज में व्याप्त नैतिक पतन और मानवीय संवेदनाओं के मर जाने की ओर इशारा करते हैं।
(ग) कवि ने किन-किन प्रश्नों को उठाया है?
कवि ने समाज और स्वयं के प्रति कई कठोर प्रश्न उठाए हैं, जैसे:
- क्या हम सचमुच इतने गहरी नींद में सोए हैं कि हमें अपने आस-पास हो रहे अन्याय और अत्याचार दिखाई नहीं देते?
- क्या हमारी आँखें सिर्फ देखने के लिए हैं, उनमें देखने की शक्ति नहीं रह गई है?
- क्या हमारे कान सिर्फ शोर सुनने के लिए हैं, वे करुणा की पुकार सुनने में असमर्थ हो गए हैं?
- हम कब तक इस तरह की घटनाओं को देखते रहेंगे और चुपचाप सहते रहेंगे?
- क्या हमारी मानवता और संवेदनशीलता मर गई है?
(घ) ‘हमारी नींद’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
‘हमारी नींद’ कविता का मूल भाव है समाज में व्याप्त नैतिक शिथिलता, संवेदनहीनता और जागरूकता के अभाव पर करारी चोट करना। कवि बताना चाहता है कि हम एक ऐसी गहरी और खतरनाक नींद में सोए हुए हैं जहाँ हम अपने ही घर और समाज में हो रहे पाप, अन्याय और अमानवीय व्यवहार को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। कविता हमें इस नींद से जगाने, अपनी संवेदनाओं को जीवित करने और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का आह्वान करती है। यह एक प्रेरणादायक कविता है जो हमें सामाजिक दायित्व का एहसास कराती है।
2. सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :
(क) ‘हमारी नींद’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(A) सुमित्रानंदन पंत
(B) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(C) अशोक वाजपेयी
(D) महादेवी वर्मा
(ख) कवि के अनुसार हम किस नींद में सोए हुए हैं?
(A) मीठी नींद
(B) गहरी नींद
(C) पत्थर की नींद
(D) ख्वाबों की नींद
(ग) कवि ने किसके हाथों पिटाई खाने की बात कही है?
(A) बहन के
(B) माँ के
(C) पत्नी के
(D) बेटी के
(घ) कविता में किसके बेचे जाने की बात कही गई है?
(A) बहन के
(B) माँ के
(C) पत्नी के
(D) बेटी के
3. निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(क) “क्या हम सचमुच इतने गहरे सोए हैं
कि हमें कुछ भी दिखाई नहीं देता?”
प्रसंग: यह पंक्तियाँ अशोक वाजपेयी द्वारा रचित कविता ‘हमारी नींद’ से ली गई हैं। कवि समाज की संवेदनहीनता पर प्रश्न उठा रहा है।
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि समाज से एक मार्मिक प्रश्न पूछ रहा है। वह पूछता है कि क्या हम वास्तव में इतने आलस्य और उदासीनता की गहरी नींद में सो गए हैं कि हमारी आँखों के सामने हो रहे अन्याय, अत्याचार और सामाजिक बुराइयाँ भी हमें दिखाई नहीं देतीं? यहाँ ‘दिखाई न देना’ शारीरिक अंधेपन की नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति हमारी अंधेपन की स्थिति को दर्शाता है। कवि हमें हमारी इस भयानक उदासीनता के प्रति आगाह कर रहा है।
(ख) “क्या हमारी आँखें सिर्फ देखने के लिए हैं
उनमें देखने की शक्ति नहीं रह गई है?”
प्रसंग: यह पंक्तियाँ उसी कविता से हैं, जहाँ कवि मनुष्य की संवेदनशीलता पर प्रहार कर रहा है।
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि एक गहन दार्शनिक प्रश्न उठाता है। वह कहता है कि मात्र दो जीवित आँखें होना ही पर्याप्त नहीं है। असली प्रश्न यह है कि क्या हमारी आँखों में वह दृष्टि (अंतर्दृष्टि) और संवेदनशीलता शेष रह गई है जो दिखाई देने वाली घटना के पीछे छिपे दुःख, पीड़ा और अन्याय को समझ सके? कवि का आशय है कि हमने घटनाओं को महज देखना शुरू कर दिया है, उन्हें ‘देख’ कर उनका विश्लेषण करना, उन पर विचार करना और प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया है। यह मानवीय गुणों का ह्रास है।
हमारी नींद - प्रश्नोत्तर
प्रश्न 5. और लोग भी हैं, कई लोग हैं
अभी भी
जो भूलें नहीं करता
साफ और मजबूत
इनकार।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के 'हमारी नींद' काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों में कवि वीरेन डंगवाल समाज के उस वर्ग की ओर हमारा ध्यान खींचते हैं जो नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहता है। कवि कहते हैं कि अत्याचारियों और शोषकों के बीच भी ऐसे बहुत से लोग मौजूद हैं जो अपने स्पष्ट और दृढ़ संकल्प के कारण गलतियाँ करने से इनकार कर देते हैं। ये लोग भूल या अनैतिकता को स्वीकार नहीं करते। उनके भीतर ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रबल भावना होती है। ये वे सामान्य जन हैं जो चुपचाप समाज और राष्ट्र के निर्माण में लगे रहते हैं, बुराई के आगे झुकते नहीं और अपने साफ-सुथरे इरादों से जीवन जीते हैं। कवि इन्हीं लोगों के माध्यम से आशा और संघर्ष का संदेश देते हैं।
कवि परिचय
वीरेन डंगवाल प्रमुख समकालीन हिंदी कवि हैं। इनका जन्म 5 अगस्त, 1947 को टिहरी-गढ़वाल (उत्तराखंड) के कीर्तिनगर में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद उन्होंने आधुनिक हिंदी कविता के मिथकों और प्रतीकों पर शोध कर डी.लिट् की उपाधि प्राप्त की। वे बरेली कॉलेज में लंबे समय तक अध्यापन से जुड़े रहे। डंगवाल जी ने पत्रकारिता भी की और दैनिक 'अमर उजाला' के संपादकीय सलाहकार रहे।
उनकी कविता में समाज के साधारण और हाशिए के लोगों के जीवन का यथार्थ चित्रण मिलता है। उनकी भाषा में देशज अनुभवों की सशक्त उपस्थिति है। 'दुष्वृक्ष में सृष्टा' काव्य संग्रह पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्हें 'इसी दुनिया में' संग्रह पर रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, शमशेर सम्मान तथा श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उन्होंने नाज़िम हिकमत, पाब्लो नेरुदा जैसे अंतरराष्ट्रीय कवियों की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद भी किया है।
पाठ का सारांश
प्रस्तुत कविता 'हमारी नींद' वीरेन डंगवाल के संग्रह 'दुष्वृक्ष में सृष्टा' से ली गई है। यह कविता हमारी सुविधाभोगी, बेपरवाह और आरामतलब जीवनशैली के बरक्स उन लोगों के निरंतर संघर्ष को दर्शाती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन की गति को आगे बढ़ाते रहते हैं। कवि कहते हैं कि हमारी नींद एक तरह की उदासीनता और असंवेदनशीलता का प्रतीक है। हम अत्याचार देखते हैं, शोषण देखते हैं, फिर भी चुपचाप सोए रहते हैं। दूसरी ओर, जीवन अपनी गति से चलता रहता है - सूत के पौधे बढ़ते हैं, पीड़ित जन संघर्ष करते हैं, और कुछ लोग अपने साफ और मजबूत इनकार के साथ अन्याय का विरोध करते रहते हैं। कविता हमें इस 'नींद' से जागने और जीवन के प्रति सजग होने का आह्वान करती है।
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